UPTET Bal Vikas Evam Shiksha Shastra Ruchi Abhiruchi Study Material

UPTET Bal Vikas Evam Shiksha Shastra Ruchi Abhiruchi Study Material : आज की इस पोस्ट में आप सभी अभ्यर्थी UPTET and CTET Bal Vikas Evam Shiksha Shastra Books and Notes Chapter 11 अभिरुचि / रूचि Study Material in Hindi में पढ़ने जा रहे है | UPTET Chapter 11 in Hindi PDF में Download करने के लिए सबसे निचे दिए गये टेबल पर जाकर क्लीक करें |

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अभिरुचि/रुचि | UPTET बाल विकास एवं शिक्षा शसस्त्र Chapter 11 अभिरुचि / रूचि in PDF

ड्रेवर एवं वालरस्टीन (Drever and Wallerstein) के अनुसार, रुचि पद का प्रयोग सामान्यतः दो अर्थों में होता है—कार्यात्मक अर्थ (Functional Meaning) तथा संरचना मक अर्थ (Structural Meaning)। कार्यात्मक अर्थ में अभिरुचि का तात्पर्य एक ऐ भाव की अनुभूति से होता है (जिसे एक सार्थक अनुभूति कहा जाता है) जो किसी व पर दिये जानेवाले ध्यान या कोई किये जानेवाले कार्य से संबंधित होता है। » रिली (Reilly) के अनुसार, अभिरुचि बालकों में एक प्रेरणात्मक बल के रूप कार्य करता है, जिसके परिणामस्वरूप वह किसी वस्तु को अन्य वस्तुओं से अला कर उस पर विशेष ध्यान देता है।

अभिरुचि के प्रकार Types of Interest

सुपर एवं क्राइटीस (Super and Crities) द्वारा अभिरुचि को निम्न प्रकार से । वर्गीकृत किया गया है-

बिसान (a) व्यक्त अभिरुचि (Expressed interest): व्यक्त अभिरुचि वैसी अभिरुचि के कहा जाता है जिसमें किसी एक क्रिया (Activity) की तुलना में व्यक्ति किसी दूसरी क्रिया को अधिक पसंद करने की स्पष्ट अभिव्यक्ति करता है। उदाहरण—शिक्षक द्वार पूछने पर छात्र यदि स्पष्ट रूप से यह कहता है कि उसे संस्कृत एवं हिन्दी अन्य विषय की तुलना में अधिक रुचिकर लगता है, तो यह व्यक्त अभिरुचि (Expressed Interest का उदाहरण होगा। ळायव (b) प्रकट अभिरुचि (Manifest iterest): प्रकट अभिरुचि से तात्पर्य वैसी अभिरुदि से होता है जिसकी अभिव्यक्ति व्यक्ति द्वारा स्वतः अपनी इच्छा से कोई काम कर से होती है उदाहरण—यदि कोई छात्र प्रायः खाली समय में क्रिकेट खेलता है, तो ऐस कहा जाता है कि क्रिकेट में उसकी अभिरुचि है और यह अभिरुचि प्रकट अभिरुचि के उदाहरण होगा।

(c) आविष्कारिकात्मक अभिरुचि (Inventoried interest): आविष्कारिकात्मक अभिरुचि वैसी अभिरुचि को कहा जाता है, जिसका ज्ञान मानक अभिरुचि आविष्कारिक (Standard Interest Inventory) का क्रियान्वयन करने के बाद पता चलता है। – शिक्षाशास्त्रियों ने परीक्षित अभिरुचि (Tested Interest) का वर्णन बाद में किया।

परीक्षित अभिरुचि (Tested Interest): परीक्षित अभिरुचि से तात्पर्य वैसी अभिला से होता है जिसकी झलक व्यक्ति की उपलब्धियों (Achievement) से होती व उदाहरण के लिए यदि किसी छात्र को गणित विषय में अधिक अंक मिलते हैं, ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि गणित में उसकी अभिरुचि अधिक है।

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स्कूलों में बालकों की अभिरुचि को प्रभावित करनेवाले कारक Factors Influencing Children’s Interest in School

रुचि को प्रभावित करनेवाले कारक निम्नलिखित हैं

प्रारंभिक विद्यालय की अनुभूतियाँ (Early School Experiences): वैसे बालक जो शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्कूल जाने के लिए तैयार रहते हैं, उन्हें विद्यालय में समायोजन (Adjustment) करने में काफी सफलता मिलती है। ऐसे बालकों में प्रारंभिक विद्यालय की अनुभूतियाँ (Experiences) आनंददायक होती है।

जब बालक अपने माता-पिता या अभिभावक के मात्र दबाव से विद्यालय भेजे जाते * अर्थात जब बालक शारीरिक एवं मानसिक रूप से तैयार नहीं रहने के बावजूद स्कल में भेज दिये जाते हैं तो उन्हें वहाँ समायोजन करने में काफी दिक्कत होती है और धीरे-धीरे उनकी शैक्षिक अभिरुचि घटती चली जाती है।

(b) माता-पिता का प्रभाव (Parental Influences): माता-पिता का प्रभाव सामान्य रूप से विद्यालय के प्रति बालकों की मनोवृति पर पड़ता है।

(c) भाई-बहनों की मनोवृति (SiblingAttitudes): यदि बड़े भाई-बहनों की मनोवृति किसी विषय या शिक्षक के प्रति प्रतिकूल होती है, तो इसका प्रभाव बालक पर भी पड़ता है। उनमें भी वैसे ही मनोवृत्ति और उसी के अनुरूप अभिरुचि (Interest) विकसित हो जाती है। ऐसे बालक भी उन विषयों या शिक्षकों के प्रति नापसंदगी दिखाना प्रारंभ कर ( देते हैं।

(d) साथी-संगी की मनोवृति (Peers Attitude) : बालकों की अभिरुचि उनके साथी-संगी की मनोवृति द्वारा भी प्रभावित होती है। जब बालकों के साथियों की मनोवृति किसी विषय के प्रति प्रतिकूल हो जाती है तो इसका प्रभाव बालक पर भी पड़ता है और उनमें वैसी ही अभिरुचि विकसित हो जाती है।

(e) शैक्षिक सफलता (Academic Success): बालकों की अभिरुचि पर शैक्षिक सफलता का सीधा प्रभाव पड़ता है। यदि किसी बालक को स्कूल में लगातार शैक्षिक सफलता मिलती जाती है, तो इससे उसमें आत्मसंतोष उत्पन्न होता है और उसकी अभिरुचि शैक्षिक क्रियाकलाप एवं अध्ययन में अधिक बढ़ जाती है।

(1) कार्य के प्रति मनोवति (Attitude toward work): जिस वातावरण में बालक का पालन-पोषण होता है बालकों के कार्यों की रुचि भी उसी प्रकार के वातावरण में होती है।

8) शिक्षक छात्र (Teacher-Pupil Relationship): बालक स्कूल में दी जानेवाली राक्षा म कितनी अभिरुचि दिखाते हैं यह इस बात पर निर्भर करता है कि उनकी शिक्षकों व्याक्तगत अनुभूतियाँ (Personal Experience) कैसी हैं। यदि उनकी व्यक्तिगत तिया दुःखद है तो बालक की शैक्षिक अभिरुचि (Educational Interest) कम हो जायेगी। का सांवेगिक वातावरण, शिक्षको का मना

(h) स्कूल का सांवेगिक वातावरण (Emotional Climate of the school क वातावरण, शिक्षकों की मनोवति (Attitudes) एवं शिक्षकों द्वारा प्रतिपादित अनुशासन के नियम  क नियमों से प्रभावित होता है। वैसे शिक्षक जो कक्षा में प्रजातांत्रिक ढंग से cratically) बालकों को पढाते हैं तथा आकर्षक एवं मनोरंजक ढंग से बालको

के साथ अनुक्रिया करते हैं, छात्रों में स्कूल एवं शिक्षा के प्रति अभिरुचि उत्पन्न करने में सफल होते हैं।

> यदि शिक्षक कक्षा में अधिकारवादी ढंग से (Authoritatively) या अत्याधुनिक ढंग से छात्रों के साथ व्यवहार करते हैं या उनके पढ़ाने का ढंग अधिक ही उबाऊ होता है। ऐसी स्थिति में छात्रों में शिक्षा के प्रति रुचि में कमी आ जाती है या ऐसे छात्र प्रायः स्कूल से अपने आपको दूर रखने का कोई-न-कोई बहाना खोजते रहते हैं |

अभिरुचि का मापन Measurement of Interest

अभिरुचि के मापन के दो तरीके सर्वाधिक लोकप्रिय हैं-

1.शिक्षक-निर्मित प्रविधियाँ (Teacher-made Techniques): छात्रों की अभिरुचियों को मापने की कुछ ऐसी प्रविधियाँ (Techniques) हैं जिन्हें शिक्षकों द्वारा विशेष उद्देश्य से बनाया जाता है। यह विधि निम्नलिखित है-

(a) चिह्नांकन सूची (Check List): चिह्नांकन सूची में शिक्षक विभिन्न शैक्षिक कार्यक्रम (Educational Activities) की एक सूची तैयार करते हैं। छात्रों को यह सूची इस निवेदन के साथ दे दिया जाता है कि जिन शैक्षिक क्रियाओं में उनकी अभिरुचि हो उनमें सही का चिह्न (1) लगा दें। > इससे शिक्षकों को छात्रों की सभी प्रमुख रुचि का कम समय में ही अच्छा ज्ञान हो जाता है। छात्रों की अभिरुचि मापने की यह सरल विधि है।

(b) श्रेणीकरण (Ranking) : इस विधि में शिक्षक विभिन्न तरह की शैक्षिक क्रियाओं की एक सूची तैयार करते हैं जो छात्रों को इस निवेदन के साथ देते हैं कि वे इन क्रियाओं को अपनी अभिरुचि के क्रम में श्रेणीकरण कर दें। 1 की कोटि (Rank) उस क्रिया को दें जिसमें उनकी रुचि सबसे अधिक हो, उससे कम पसंद की रुचि को 2 की कोटि दे और इस प्रकार अंतिम कोटि उसे दें जिसमें उनकी रूचि सबसे कम हो।

> श्रेणीकरण से पहले छात्रों की विशेष रुचि का पता चलता है। दूसरा, जब प्रत्येक क्रिया का प्रत्येक छात्र द्वारा दी गयी कोटि के द्वारा औसत कोटि (Average Rank, ज्ञात कर ली जाती है, तो इससे पूरी कक्षा के अधिमान (Class Preferences) का आसानी से मूल्यांकन हो जाता है।

पसंदगी एवं नापसंदगी की मात्रा को दी गयी मापनी (Scale) के बिन्दुओं में से किस एक पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करके करते हैं। जैसे (A) पत्रिका पढ़ना अत्यधिक पसंद-पसंद-तटस्थ-नापसंद-अत्यधिक नापसद । (B) संगीत सुनना—अत्यधिक पसंद-पसंद-तटस्थ-नापसंद-अत्यधिक नापसदा दिये गये उत्तर का विश्लेषण करके छात्रों की पसंदगी तथा नापसंदगी का पता किय जाता है। सामान्यतः विश्लेषण करने के लिए अत्यधिक पसंद, पसंद, तटस्थ नापसंद तथा अत्यधिक नापसंद के लिए क्रमशः 5, 4, 3, 2 एवं 1 का अंक दिया जाता है।

(d) स्वतंत्र अनुक्रिया प्रविधि (Free Response Technique): इस विधि में शिक्षण छात्रों से कछ ऐसे प्रश्न करते हैं जो उनकी आदत, शोक (Hobby) या उन क्रियाग

से सम्बन्धित होते हैं जिनमें उनकी अभिरुचि अधिक होती है। यहाँ छात्र उन प्रश्नों की भिव्यक्ति करने में अपनी इच्छानुसार शब्दों का प्रयोग करते हैं। मानक अभिरुचि आविष्कारिका (Standard Interest Inventory): अभिरुचि ना विशेषज्ञों द्वारा लगभग 62 मानक अभिरुचि आविष्कारिका उपलब्ध कराये शिक्षा के दृष्टिकोण से तीन मानक अभिरुचि आविष्कारिका महत्वपर्ण हैं. स्ट्राँग अभिरुचि आविष्कारिका (Strong Interest Inventory or SII): इस रिका का निर्माण ई. के. स्ट्राँग (EK Strong) द्वारा किया गया। इस आविष्कारिका स . एक फार्म का प्रयोग पुरुषों की अभिरुचि मापने में किया जाता है और र्म का प्रयोग महिलाओं की रुचि मापने में किया जाता है। दोनों फार्म द्वारा उच्च विद्यालय, कॉलेज के छात्रों एवं वयस्को की रुचि का मापन होता है।

प्रत्येक फार्म में 400-400 एकांश है जिनके द्वारा व्यक्तियों की रुचि मूलतः विभिन्न स्कल के विषयों, पेशा (Occupation), विभिन्न तरह के मनोरंजन (Amusements) इत्यादि के प्रति मापी जाती है।

> SII में व्यक्तियों की अभिरुचि को मानक प्राप्तांक (Standard Score) यानी प्राप्तांक के रूप में व्यक्त किया जाता है। कैंपबेल (Campbell) के अनुसार यदि किसी छात्र या व्यक्ति का प्राप्तांक 57 या 58 से अधिक आता है, तो यह समझा जाता है कि उस व्यक्ति या छात्र की अभिरुचि उस विषय या क्षेत्र में एक सामान्य व्यक्ति की अभिरुचि से श्रेष्ठ है।

SBIV के पुरुष फार्म का दो बार संशोधन हो चुका है—एक बार 1938 में दूसरी बार 1966 में। महिला फार्म का भी दो बार संशोधन हो चुका है—एक बार 1946 में और दूसरी बार 1969 में।

1974 में कैम्पबेल ने SBIV का संशोधित प्रारूप प्रस्तुत किया, जिसे स्ट्राँग कैंपबेल अभिरुचि आविष्कारिका कहा गया। इसमें 325 एकांश थे जिसके द्वारा पेशा (Occupation), स्कूल विषय (School Subjects), क्रियाएँ (Activities), मनोरंजन (Amusements), व्यक्तियों के प्रकार (School Subjects), दो क्रियाओं के बीच वरीयता इत्यादि के प्रति अभिरुचि का मापन होता है। -Bा कुडर परीक्षण (Kuder Tests): इस परीक्षण का निर्माण जी. एफ. कुडर द्वारा 1904 म तथा उसके बाद के भिन्न वर्षों में किया गया। विभिन्न वर्षों में कुडर (Kuder) ने व मापन के लिए कुल 4 परीक्षणों का निर्माण किया है। कडर व्यक्तिगत अधिमान der Personal Preference Record), कुडर वोकेशनल इंटरेस्ट सर्वे, फार्म uder Vocational Interest Survey), औकपेशनल इंटरेस्ट सर्वे, फार्म डी (तथा जेनरल इंटरेस्ट सर्वे । जनरल इंटरेस्ट सर्वे द्वारा 10 विभिन्न क्षेत्रों में व्यक्तियों की अभिरुचि का मापन होता है यांत्रिक (Mechanical), a त्रिक (Mechanical), वैज्ञानिक (Scientific), लिपिक (Clerical), सामाजिक सेवा (Social Service), स वा (Social Service), संगीत (Musical), साहित्यिक (Literary), कलात्मक (Artistic), परिकल्पनात्मक (Artistic), परिकल्पनात्मक (Computational), बाहर (Outdoors) तथा प्रत्ययकारी (Persuasive)।

औकुपेशनल इंटरेस्ट सर्वे, फार्म डी द्वारा 52 विभिन्न पेशाओं में व्यक्तियों की अभिरुचि मापी जाती है तथ फार्म डी द्वारा महिलाओं के लिए 57 विभिन्न पेशा में तथा पुरुषों के लिए 79 विभिन्न पेशा में रुचि मापी जाती है।

( माइनेसोटा वोकेशनल इंटरेस्ट इन्वेंट्री (Minnesota Vocational Interest ___Inventory or MVII): इस परीक्षण का निर्माण 1965 में किया गया था तथा इसके द्वारा 21 पेशाओं में वैसे व्यक्तियों की अभिरुचि की माप की जाती है जिनमें कॉलेज की शिक्षा ठीक से नहीं हो पायी है जिनमें अर्द्ध-कौशल कार्य के प्रति उन्मुखता अधिक होती है।

अभिरुचि में शिक्षा का महत्व Importance of Interest in Education

कक्षा में छात्रों की रुचि पठन-पाठन में बनाये रखने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए-

(a) शिक्षकों को कक्षा में प्रजातंत्रात्मक माहौल बनाना चाहिए ताकि छात्र के मन में शिक्षक या स्कूल के प्रति किसी प्रकार का भय तथा संशय न रहे।

(b) शिक्षक को कक्षा में सरल भाषा या समझने योग्य भाषा का प्रयोग करना चाहिए ताकि शिक्षक की बातों को सुनने तथा समझने में छात्रों की रुचि बना रहे ।

(c) शिक्षकों को कक्षा में छात्रों की रुचि बनाये रखने के लिए पढ़ाते समय चित्र मॉडल तथा श्रव्य-दृश्य उपकरणों का प्रयोग करना चाहिए।

(d) शिक्षकों को कक्षा में पठन-पाठन का स्तर छात्रों के बुद्धि-स्तर के अनुरूप रखना। चाहिए।

(e) शिक्षकों को समय-समय पर छात्रों को गैर-शैक्षिक कार्यक्रम जैसे—खेल-कूद, वादविवाद, प्रतियोगिता तथा भ्रमण इत्यादि में भाग लेने के लिए प्रेरित करते रहना चाहिए ।

(6) प्रत्येक शिक्षक को अभिरुचि के सिद्धांत का ज्ञान होना चाहिए।

परीक्षोपयोगी तथ्य

अभिरुचि में व्यक्ति वस्तुओं या क्रियाओं का चयन करके उसे पसंद-नापसंद विमा में कोटिबद्ध करता है।

अभिरुचि/रुचि (Interest) के कई प्रकार हैं जिनमें व्यक्त अभिरुचि (Expressed Interest),प्रकट अभिरुचि (Manifest Interest) तथा आविष्कारिकात्मक अभिरुचि (Inventoried Interest) प्रधान है।

अभिरुचि को प्रभावित करनेवाले कारक हैं प्रारंभिक विद्यालय की अनुभूतिया माता पिता का प्रभाव, भाई-बहनों की मनोवृत्ति, साथी-संगी की मनोवृत्ति, शैक्षिक सफलता, कार्य के प्रति मनोवृत्ति, शिक्षक, छात्र तथा स्कूल का सांवेगिक वातावरण इत्यादि।

भचिकेमापन की दो विधि है शिक्षक-निर्मित प्रविधियाँ (Teacher Madi Techniques) तथा मानक अभिरुचि आविष्कारिका (Standard Interes Inventories)

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